एक ख़त सीरिया से……

For children of Syria….( a letter to GOD)

ख़ुदा सुनो !

वहां सीरिया में….
हो सके तो -लगा दो कोई
कल कारखाना रोटियों का,
सुना वहां पे कितनी नन्ही भूखों ने
बहुत दिनों से कुछ खाया नहीं है..
कुछ पाएं तो दुआएं देंगे।।
बचेंगे तो मानेंगे तुमको….

रोटियां बन भी जाएँ
भरोसा शायद बनने न पाए
वहाँ किसी में बचा नहीं है
हो सके तो भिजवा ही देना

पिछली दफे जो भेजे थे तुमने …
रिश्ते सारे खुले खुले से…
सियासतों के गर्म मौसमों में…
पहुंचते- पहुंचते बिगड़ गए थे।
ये भरोसा अबके जो भेजो,
भिजवाना बंद पैकेटों में।

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