मैं चलता रहा। ..MOTIVATIONAL POEM IN HINDI

रात खिड़की से – मुझको बुलाते रहे…
वो सपने -जो बरसों जगाते रहे।
उन ख्वाबों की -पगडण्डी थामे हुए…
घर से निकले थे कब !- अब ज़माने हुए।
तूने तक़दीर दी  – मैं बदलता रहा…
पॉव जलते रहे – मैं चलता रहा।

तूने शीशे के जैसे – दो दिन थे दिए…
‘खन्न’ से  टूटे थे वो – दो दिन न जिए।
उस टूटन पे जब – सब  मायूस थे…
जो खनका था न ! मैं वो सुनता रहा।
मन बिखरा था – लेकिन मचलता रहा..
पॉव जलते रहे – मैं चलता रहा।

सर पे चढ़कर – वो आता भी था
दोपहर को – आँखे दिखता भी था
मैं जल जाऊं – उसने वो शोले दिए
शाम आँखों में देखे – जो मेरे रौशन दिए
सूरज समंदर में छुपकर – पिघलता रहा
पॉव जलते रहे – मैं चलता रहा

जल गयीं बस्तियां – मत परेशान हो…
खोज लें राख में – जो बचा निशान हो।
देख ले – सोच ले – ये महसूस कर…
अभी भी धुआं – उठता है अगर…
कुछ तो है बचा -जो अब तक जलता रहा। .
पॉव जलते रहे – मैं चलता रहा।

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