छोटा सा सच !

छोटा सा सच !

 पहले , हर बच्चे के दो-दो जन्मदिन हुआ करते थे. पहला पूर्णतः निजी ! जो बच्चे के अभिभावक एक डायरी में लिख कर के रखते थे. आवश्यकता पड़ने पर यह संवेदनशील जानकारी सिर्फ घर के पंडित जी के साथ में साझा की जाती थी. ( even wikileaks and cambridge analitica couldnt break the firewall of that godrej almirah) दूसरा विशुद्ध सरकारी ! […]

अब बोल भी दो…

अब बोल भी दो…

Happy women’s day…. तुम्हारी लम्बी खामोशियाँ अब….  जहाँ के कानों को खल रही हैं पुराने मौसम बदलेंगे शायद नयी हवाएं चल रही हैं अबके बारिश बरसे जो बादल बूँद बूँद तुम्हारी आवाज़ बरसे वो पट्टी जो मुँह पे बंधी तुम्हारी खोल भी दो बोलो मेरी जान अब बोल भी दो छू न पायी , उन हिमालयों की चोटियों से जली […]

रंग ….

रंग ….

ये रंग क्या है ?…. कहाँ बना था? रखा कहाँ था ?……. सबसे पहले। मेरा गेरुआ- और हरा तुम्हारा, बंटा था जब- उससे भी पहले ! रखा कहाँ था ?…. बनाने वाले ने जब बनायीं  ये दुनिया यकीं है मेरा- सादी ही होगी ! बेरंग दुनिया में रंग भरने,  उसने सदियां लगाई होंगी !   पहले रंगो के कारखाने लगाए […]