LETS BREAK THE CAGE..

Let’s start with a poem …….or with a story…doesn’t matter.. well this poem is a sort of story itself , a story which most of us share.

Don’t you think that the happiest times we had were our childhood.

Don’t you think the biggest dreams we had were with the tiniest eyes.

we are not the same… why ?

WE HAVE BEEN TRAINED TO DENY MAGIC OF LIFE

 

Lets check out…

 

 

जो थोड़ा पढ़ गया मैं…..

खूबसूरत चाँद वो…..

पत्थर का इक टुकड़ा हुआ।

मेरी परछाईं में…

अपनी अक्स में… सिमटा हुआ।

 

रिश्ता टूटा उससे , उसी दिन,

मैं रात भर रोता रहा।

मुझसे बेगाना मामा मेरा वो…

चैन से सोता रहा।

 

उस रात छत पे चढ़ के जाने,

उसको क्या क्या कह गया मैं।

जो थोड़ा पढ़ गया मैं…

 

टेस्टोस्टेरोन-एस्ट्रोजन के चक्कर,

प्यार जिन्हे तुम कहते हो।

खुदा समझ कर और किसी को…

सजदा करते रहते हो।

 

मैं भी हो जाता तुम्ही सा..

शुक्र खुदा का इतना है।

नुकसान -नफा सब समझ गया मैं..

इल्म बहुत है जितना है।

 

हाँ ज़िन्दगी की भीड़ मैं बस…

थोड़ा तन्हा रह गया मैं।

जो थोड़ा पढ़ गया मैं…

 

पहले जो काम थे केवल,

छोटे बड़े फिर काम हुए।

चार रोज़ जो बैठे घर पर…

पढ़ लिख कर..

बदनाम हुए।

 

और पापा की इक डांट हे भर पे..

दो दिन खाना न खाने वाला

दो जून की रोटी को अब..

जाने  क्या सह गया मैं

जो थोड़ा पढ़ गया मैं

 

If you need explanation you can read this again

or you can jump to end

 

( MY CHILDHOOD)

 

 

जो थोड़ा पढ़ गया मैं…..

खूबसूरत चाँद वो…..

पत्थर का इक टुकड़ा हुआ।

मेरी परछाईं में…

अपनी अक्स में… सिकुड़ा हुआ।

(It was god for my mother on various occasions, MAMA in stories of my grandma. And in one geography class I  lost it all ; they said moon is nothing but a natural satellite of earth and they home craters not angles .)

 

रिश्ता टूटा उससे , उसी दिन,

मैं रात भर रोता रहा।

मुझसे बेगाना मामा मेरा वो…

चैन से सोता रहा।

(They killed my friend and relative (moon), they killed my dreams , mercilessly! … unknowingly)

 

उस रात छत पे चढ़ के जाने,

उसको क्या क्या कह गया मैं।

जो थोड़ा पढ़ गया मैं…

(I lost my aptitude to talk elders with my new knowledge (which would have given me more sincerity instead)  and on that very night I fight him( moon) over the roof ..LAST TIME)

(MY TEEN DAYS)

टेस्टोस्टेरोन-एस्ट्रोजन के चक्कर,

प्यार जिन्हे तुम कहते हो।

खुदा समझ कर और किसी को…

सजदा करते रहते हो।

(I was smart enough to know that LOVE is nothing but effect of some hormones (testosterone-estrogen) I endorsed logic and denied magic.)

मैं भी हो जाता तुम्ही सा..

शुक्र खुदा का इतना है।

नुकसान -नफा सब समझ गया मैं..

इल्म बहुत है जितना है।

(I saved myself against probable losses; thanks to my KNOWLEDGE)

 

हाँ ज़िन्दगी की भीड़ मैं बस…

थोड़ा तन्हा रह गया मैं।

जो थोड़ा पढ़ गया मैं…

Does this need any explanation?

(AFTER MY STUDIES)

पहले जो काम थे केवल,

छोटे बड़े फिर काम हुए।

चार रोज़ जो बैठे घर पर…

पढ़ लिख कर..

बदनाम हुए।

(I dint courage my first dream job to be a balloon vendor; cause I started feeling them as inferior. And that 5th grader still pass by my house happily with those colorful balloons playing flute, and I left with overburdened knowledge…. society conscious ….unhappy.)

 

और पापा की इक डांट हे भर पे..

दो दिन खाना न खाने वाला

दो जून की रोटी को अब..

जाने  क्या सह गया मैं

जो थोड़ा पढ़ गया मैं…

(When I had nothing I was king of my house and with all my knowledge I have became a servant)


 

I read somewhere that structure of a bumblebee is not aerodynamically correct !

Then… they shouldn’t fly!

Thank god nobody told this fact to bees instead.

Lets ignore the fact what we can not do, lets focus on what we love, lets believe in magic

Lets learn from nature , from smallest parts of nature, from bees , from birds..

And break this psychological cage..

lets FLY………………

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