POINT OF VIEW explained in hindi

 

दोस्तों हमारा ब्लॉग HinglishLy.com  मुख्य रूप से  सफल(successful )और प्रसन्न जीवन(happy life) जीने के तरीकों की खोज करता है ,  और आपके व्यावहारिक जीवन की समस्याओं (जैसे आपकी पढाई (studies),  करियर (carrier), ऑफिस एवं जीवन में संतुलन(work life balance), जीवन का उत्साह( motivation) आदि  का समाधान रोचक तरीकों से आपके सामने प्रस्तुत करता  है,

हमारा ब्लॉग गुणवत्ता से समझौता  किये बिना हिंदी एवं अंग्रेजी दोनों भाषाओँ में उत्तम सामग्री उपलब्ध कराने को प्रतिबद्ध है

मुझे आपके सामने अपनी पहली हिन्दीभाषी पोस्ट प्रस्तुत करते हुए बहुत ख़ुशी हो रही है।

आज की चर्चा का विषय हमारा दृष्टिकोण है (POINT OF VIEW) , कहते हैं अगर आप दुनिया को बदलना चाहते हैं तो अपना दृषिकोण बदलने से शुरुवात करे क्यों की इत्ते भर से आप अपना आधे से ज्यादा काम समाप्त कर चुके होते हैं

कुछ बातें हमारे अंतर्मन में समाज द्वारा जाने -अनजाने में बो दी जाती हैं , जैसे महिलाएं ऐसा व्यव्हार करती हैं और पुरुष ऐसा , उत्तर भारतीय ऐसे होते हैं या दक्षिण भारतीय ऐसे , हिंदी किताबें ऐसी होती हैं या अंग्रेजी ऐसी  अब क्योंकि हमारा मष्तिस्क भार नहीं लेना चाहता, तो वो इन पूर्वानुमानो को फैसले लेने के लिए कुछ तय फार्मूलों की तरह प्रयोग करता है , लेकिन चीज़ों को आसान बनाने की इस प्रक्रिया में हम कभी कभी जीवन में कुछ बहुत अच्छा और सर्वोत्तम  पाने से चूक जाते हैं , ( जैसे कभी किसी जाति या क्षेत्र विशेष का दोस्त बस परिचित बन कर रह जाता है , हम  किसी महिला को उसके प्रदर्शन का श्रेय देने से चूक जाते हैं, या एक कालजयी रचना सिर्फ हिंदी में लिखे होने के कारण दिवाली से पहले किसी कबाड़ी को २ रुपये में  बेच दी जाती है जो शायद आपका जीवन बदल सकती थी )

 

दोस्तों आइये इसे एक रोचक तरीके से समझते हैं। ..

मैंने कुछ साल पहले एक कविता लिखी थी (शीर्षक- आइना) , मैं आपसे अनुरोध करूँगा की इसे धीरे धीरे और पूरा पढियेगा , उस विचार के साथ जो भी आपके मन में हो…..

जब आती है वो सुबह- सुबह..

नूर का रेशम लिए हाथो में 

मेरे उनींदे से चेहरे पे गिर ही जाता है…

थोड़ा सोना -थोड़ा केसर – थोड़ा रेशम

 

आँखे मींजे जब भी बाहर पंहुचा हूँ….

सूरज में देखा है तेरा ही  कुमकुम

पर ये क्या के तूने फिर लगायी है…

बिंदिया ज़रा सी नीचे

एक मीठी सी बहस फिर हुई अपनी…

के बेहतर कौन जानेगा तेरे चेहरे को

 

रूठ कर फेरे ही था मैंने मुँह उससे…

के खुद ही ठीक की उसने बिंदिया अपनी

चमक उठी क़ायनात उसके रुख-ए-रौशन से….

उसके गुस्से की लाली भी जाती रही फ़िज़ाओं से

 

 

 

वो मुस्कुरा के आँखों से विदा ले तो लेती है,

पर शाम मिल ही जाएगी दूसरे किनारे पे

जब लहरायेगी वो अपनी  गुलाबी ओढ़नी इशारे के लिए…

मैं आऊंगा उसी वक़्त दबे पाँव बाहर

उसकी बिंदिया फिर सरक गयी होगी

फिर सवांरूँगा मैं ही उसे

ये क्या है के ये जंगल, ये पहाड़ ,ये जहाँ है उसका…

एक नदी जिसमे  वो खुद को देखे, कहाँ है उसका

बस नहीं है…… नहीं है….. नहीं है…..

कोई आइना उसका

एक मेरे सिवा….!

 

दोस्तों आइये मैं आपको एक नया दृष्टिकोण देता हूँ , एक नया और सुन्दर  दृष्टिकोण असल में  ये कविता एक  भ्रम पर आधारित है , एक ख़ूबसूरत भ्रम की ये प्रकृति  मुझे उतना ही प्रेम करती है , जितना की मैं उसे , ये सुबह , शाम , मौसम और सारे रंग  सब कुछ प्रकृति मुझे रिझाने के लिए दिखा रही है  और शायद मेरे इशारों पे चल भी रही है

अब निचे लिखी उसी कविता को दुबारा पढ़िए

 

जब आती है वो सुबह सुबह

नूर का रेशम लिए हाथो में  (strings of light)

मेरे उनींदे से चेहरे पे गिर ही जाता है

थोड़ा सोना -थोड़ा केसर – थोड़ा रेशम (doesn’t these all have color of sun rays)

 

आँखे मींजे जब भी बाहर पंहुचा हूँ

सूरज में देखा है तेरा ही  कुमकुम ( I confuse sun with her BINDI )

पर ये क्या के तूने फिर लगायी है

बिंदिया ज़रा सी नीचे (sun haven’t risen fully hence seems odd in the face of nature, a lil’ misplaced)

एक मीठी सी बहस फिर हुई अपनी

के बेहतर कौन जानेगा तेरे चेहरे को

 

रूठ कर फेरे ही था मैंने मुँह उससे  ( I exercise my authority)

के खुद ही ठीक की उसने बिंदिया अपनी  ( and it worked ! sun rises to full)

चमक उठी क़ायनात उसके रुख-ए-रौशन से  ( she placed sun at her face in right place  and looked more beautiful, more glossy )

उसके गुस्से की लाली भी जाती रही फ़िज़ाओं से ( colour of sky has changed to usual from saffron)

 

 

 

वो मुस्कुरा के आँखों से विदा ले तो लेती है

पर शाम मिल ही जाएगी दूसरे किनारे पे  

जब लहरायेगी वो अपनी  गुलाबी ओढ़नी इशारे के लिए  (just before sunset  when colour of sky will change to saffron again)

मैं आऊंगा उसी वक़्त दबे पाँव बाहर

उसकी बिंदिया फिर सरक गयी होगी  ( I know she does that to engage me only, no other point)

फिर सवांरूँगा मैं ही उसे

ये क्या है के ये जंगल ये पहाड़ ये जहाँ है उसका

एक नदी जिसमे खुद को देखे कहाँ है उसका

बस नहीं…. है नहीं है …नहीं है….

कोई आइना उसका

एक मेरे सिवा  ! (this illusion makes my day,……… EVERYDAY )

 

आपने दृष्टिकोण के अंतर और उसका  का प्रभाव महसूस किया होगा

you must have felt that mere change in point of view can change things…without changing the things , isn’t it !

 

उम्मीद है आपको मेरा ये प्रयोग और और मेरी पहली हिंदी पोस्ट पसंद आयी होगी मैं आपसे अनुरोध करूँगा की आप हमारे ब्लॉग  को सब्सक्राइब कर लें, जिससे हमारे नए पोस्ट्स की जानकारी आपको मिल सके आप हमें गूगल पे भी (hinglishly) सर्च कर सकते हैं,

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