ROSE DAY STORY

HAPPY ROSE DAY….

आज ऑफिस से ४ बजे ही निकल लिया,  दिन भर स्टॉक मार्किट के साथ दिल भी डूबता रहा।  तीन लाख डूब गए , बाकियों के भी डूबे , पर मेरा यक़ीन था की  बाकी बड़े लोग होंगे।  शाम होते होते मार्किट थोड़ा सुधरा पर मेरा बी पी  नहीं

रस्ते में फूलों की दुकान सजी देखी तो याद आया की आज रोज़ डे है , हमारी शादी के बाद पहला।

सुबह सोचा था बुके ले चलूँगा , अब उनकी कीमत सोच रहा था। मन में कुछ गुणा-गणित करने के बाद मेरी जेब ने ने मुझे एक गुलाब खरीदने की इजाज़त दी , जैसे क्लोजिंग में हाफ डे लीव अप्रूव कर बॉस  मदर टेरेसा वाली स्माइल देता है…… वैसे ही।

१०० रुपये का १ ?

मैंने उस सजावटी दुकान में शेल्फ पे लगी कांच में खुद को देखा , बड़ा बेचारा लग रहा था।  मुझे लगा दूकानदार कहेगा – सर आपके लायक नहीं है , “छोटू…….. साहब को गेंदे के फूल दिखाओ ”

बाइक पे थोड़ा आगे निकला , तो एक सुनसान सड़क एक बुढ़िया सड़क किनारे फूल माला बेच रही थी एक छोटे से मंदिर के ठीक बगल , टाट बिछाये

कुछ गुलाब भी थे वो आर्चीज़ के मुकाबले कुपोषित – अविकसित।  मोहल्ले के बच्चों जैसे। …

कैसे दिए ?… मैंने गुलाबों  की तरफ इशारा करके पुछा

क्या ?

ये !

कौन सा साहब ?

वही जो अमरुद के पेड़ पे लगते हैं , मैंने झल्ला के कहा

अंधी हूँ साहब – ओह सॉरी

ये गुलाब

१० का एक

हम होटल में २ प्लेट खाने के बाद हज़ारों का बिल देते हैं , जी एस टी के साथ , और एक गंभीर मुस्कान के साथ कीप द चेंज। ….

और रेडी वाले से भिंडी की कीमत पे यूं बहस करते हैं जैसे देश की इकॉनमी इन्ही चार भिंडियों ने बिगाड़ राखी है , फिर बिना पूछे धनिया और मिर्च उठाकर ये फील लाते हैं जैसे देश में ऍफ़ डी आई ले आये।

मैं भी कुछ अलग नहीं। . लूट मचा राखी है अम्मा , पीछे २ -२ रुपये में मिल रहे हैं

आप ५ दे दो साहब सबेरे से बोहनी नहीं हुई है। .

५० में टोकरी दोगी?

बुढ़िया चुप………..!

200 चाहिए थे। . मैं तो अंधी हूँ। ..बुढऊ का चश्मा भी टूट गया। .. आज गिर पड़े। .. झोपड़ी में पड़े हैं

मैं पसीज गया। .. टोकरी कितने की दी ?

१०० !

चलो दे दो

थोड़ा आगे निकला। .पर मन बेचैन था। .

दुबारा लौटा।  वही टोकरी धीमे से वापस रखी…

ये टोकरी कितने की दी। ..ये गुलाब वाली

दुबारा १०० दिए…. और शांत मन से आगे बढ़ा

तभी सामने पंचर की दुकान  वाले ने इशारे से बुलाया। .साहब कभी गाड़ी वाड़ी धुलानी हो तो लेते आना  सस्ते में धो देंगे।

क्यों चाचा तुम्हारी बोहनी नहीं हुई क्या ?

नहीं बेटा। ….

वो बुढ़िया जिससे गुलाब लिए न। ..औरत है हमारी

बस चस्मा टूटा है। …थोड़ा थोड़ा दिखता है

भगवान तुम्हे बरक्कत दे। .

मैंने उसे  टोकरी देकर कहा। ..बस एक ही चाहिए था

शर्ट की बटन खोली, एक गुलाब अंदर डाला

और चल दिया। … रियर व्यू में चेहरा देखा।

हैंडसम लग रहा था

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